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झारखंड सरकार सहायक पुलिस कर्मियों के साथ कर रही सौतेला व्यवहार

पप्पू कुमार/मेदिनीनगर

मेदिनीनगर : झारखंड राज्य में पुलिस कर्मियों की कमी को देखते हुए झारखंड सरकार ने 2017 में पूरे झारखंड राज्य में संविदा के आधार पर 2500 सहायक पुलिस कर्मियों की भर्ती की थी। जिसमें पलामू जिले से 200 सहायक पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की गई थी। पलामू जिले के सभी थाना क्षेत्रों में इस समय 165 सहायक पुलिस कार्यरत है। इनकी ड्यूटी ट्रैफिक विभाग, पीसीआर, थाने की कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए लगाई गई है।

कोरोना काल में भी सहायक पुलिस कर्मियों ने दिन-रात ड्यूटी की। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन्हें पलामू के नक्सली इलाकों में भी भेजा गया थ। उन्होंने अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाया। ऐसा करने के बाद भी झारखंड सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

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2021 में सहायक पुलिस कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर रांची में दो बार विरोध प्रदर्शन किया। इसके बावजूद इनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।

सहायक पुलिस कर्मियों का कहना है कि हमें दस हजार रुपये मिलते हैं। जिसमें उनकी वर्दी समेत ड्यूटी का पूरा खर्चा उठाना पड़ता है। दो आंदोलन के बाद सरकार की सहमति और लिखित आश्वासन के बावजूद सरकार के उदासीन रवैये को देखते हुए हमें अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। हमारी आयु सीमा भी समाप्त हो गई है। इसके बावजूद झारखंड सरकार कोई ठोस फैसला नहीं ले रही है। सरकार के इस उदासीन रवैये से व्यथित सहायक पुलिस को कभी भी हड़ताल करने को मजबूर होना पड़ सकता है।

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क्या कहते हैं सहायक पुलिसकर्मी

झारखंड सरकार की ओर से सहायक पुलिस कर्मियों की मांग है कि हमें स्थायी किया जाए. साथ ही 24 हजार रुपए मानदेय के रूप में दिए जाएं। ड्यूटी के दौरान दुर्घटना और मृत्यु के मामले में, हमारे आश्रितों को मुआवजे के रूप में 20 लाख रुपये और अनुकंपा पर नौकरी दी जानी चाहिए।

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झारखंड सहायक पुलिसकर्मी