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लातेहार: नक्सल प्रभावित क्षेत्र के सरकारी स्कूल के सैकड़ों आदिवासी छात्रों को यह युवक देता है निःशुल्क शिक्षा, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

गोपी कुमार सिंह/गारू

लातेहार : बदहाल होती शिक्षा व्यवस्था के बीच लातेहार के घोर नक्सल प्रभावित इलाके से एक सुखद तस्वीर सामने आयी है। यहां गांव का ही एक युवक सरकारी स्कूल के 100 से भी अधिक छात्र-छात्राओं को हर दिन शिक्षा देता है। जबकि युवक को विभाग या किसी अन्य माध्यम से कोई पैसा नही मिलता है। साफ तौर पर कहे तो वह सरकारी स्कूल में मुफ्त सेवा पिछले 1 साल से दे रहा है। शिक्षक की इस दरियादिली से बच्चो एवं उनके परिजनों में भी खासा उत्साह है।

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शिक्षक नहीं दे पाते बच्चों को समय

राज्य भर में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की हालत क्या है इससे शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा, कहीं शिक्षक स्कूल ही नही आते हैं तो कहीं समय से नहीं आने की शिकायत आम है। अगर आ भी गये तो उन्हें विभागीय काम का इतना बोझ होता है कि वह बच्चों को पढ़ाने में कम ही समय दे पाते हैं।

सैकड़ों आदिवासी बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे रोहित

इस बीच लातेहार के घोर नक्सल प्रभावित इलाके से एक सुखद तस्वीर सामने आयी है। दरअसल जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत घोर नक्सल प्रभावित रुद गांव में संचालित राजकीय कृत मध्य विद्यालय में अध्ययनरत लगभग 100 से अधिक आदिवासी बच्चों को गांव के ही रोहित उरांव मुफ़्त में शिक्षा देते है। मतलब उन्हें विभाग या किसी अन्य माध्यम से सरकारी स्कूल के बच्चो को पढ़ाने के लिए कोई पैसा नही मिलता है। बावजूद रोहित उरांव लगभग 1 साल से रोजाना स्कूल आकर सैकड़ों आदिवासी बच्चों को शिक्षा दे रहे है।

परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं

रोहित उरांव मूल रूप से रुद गांव के ही रहने वाले है। रोहित काफी गरीब परिवार से आते है। उनके परिवार की आर्थिक स्तिथि ठीक नही है। लिहाज़ा उन्होंने इंटर की पढ़ाई पूरी कर आगे की पढ़ाई पर विराम दे दिया। लेकिन पढ़ने और पढ़ाने की जो ललक रोहित के अंदर थी। उसे रोहित ने जिंदा रखा और अब वह गांव के सरकारी स्कूल में आदिवासी बच्चो को शिक्षा देने का काम कर रहे है। उन्हें स्कूल की शिक्षिका की तरफ से पर्व त्योहार में खर्च के तौर पर थोड़ी मदद मिल जाती है।

समाज को कलंकित करता है नक्सलवाद

रोहित उरांव बताते है कि शिक्षा देना कोई बुरा काम नही है। उन्होंने कहा शिक्षा के मामले में हमारे गांव के बच्चे काफी कमज़ोर है। तभी मैंने सोचा शिक्षा के क्षेत्र में कुछ अच्छा करने की आवश्यकता है। लिहाज़ा रुद गांव के सरकारी स्कूली बच्चो को शिक्षा देने का काम कर रहा हूं। ताकि गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर बेहतर भविष्य गढ़ सके। वह कहते है कि हमारा क्षेत्र काफी नक्सल प्रभावित है। यहां के कई युवा पूर्व में राह भटक चुके है। लेकिन मेरे मन कभी भी इस तरह का ख्याल नही आया। उन्होंने कहा नक्सलवाद समाज को कलंकित करता है। इससे दूरी बनाकर की रखना बेहतर है।

बच्चों ने भी की सराहना

इधर रोहित के इस कार्य से गांव के ग्रामीण एवं स्कूली बच्चे में भी काफी उत्साह है। गांव के ग्रामीण रोहित के कार्य की सराहना करते नही थकते है। इस सम्बंध में स्कूली छात्रा संतोषी कुमारी बताती है कि हमारे स्कूल में 100 से अधिक बच्चो के बीच मात्र एक शिक्षिका है। जिसके कारण हमलोगों को पढ़ाई में काफी दिक्कत होती थी। लेकिन जबसे रोहित सर हमलोगों को पढ़ाने आ रहे थे तब से काफी सहूलियत होने लगी है। रोहित सर बच्चों को काफी बेहतर तरीके से किसी भी विषय पर समझाते है।

रोहित उरांव का कार्य सराहनीय

इधर गांव के ही एक ग्रामीण ने बताया कि रोहित उरांव का कार्य काफी सराहनीय है। रोहित के वजह से गांव के बच्चे एवं युवा भी शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे है। उन्होंने कहा रोहित उरांव ख़ुद काफी गरीब है। लेकिन वह चाहता है कि गांव के बच्चे पढ़ लिखकर बेहतर भविष्य बनाकर गांव, प्रखंड, जिला का नाम रोशन करें।

जिला प्रशासन से मदद की उम्मीद

बहरहाल रोहित उरांव को जिला प्रशासन से थोड़ी भी मदद मिलती तो बच्चो को शिक्षा देने का जो जज्बा उनके अंदर है उसको और भी ज्यादा बल मिल सकता था।