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PTR से वन विभाग द्वारा लकड़ी जब्ती के मामले ने पकड़ा तूल, वनकर्मियों के घरों की भी तलाशी लेने की मांग

गोपी कुमार सिंह/गारू

लातेहार : पलामू टाइगर रिजर्व अंतर्गत वन प्रक्षेत्र बारेसांढ़ के झुमरीटोला से 6 दिसम्बर की दोपहर वन विभाग की टीम ने बेशकीमती लकड़ी ज़ब्त की थी। विभागीय कर्मियों ने रामसेवक राम के घर से साल, बिया, गम्हार का चिरान व पटरा समेत फर्नीचर बनाने के औजार जब्त किये थे। जिसे बाद में वन परिसर बारेसांढ़ लाया गया था। वन विभाग को इस कारवाई के लिए कड़ी मशक्कत भी करनी पड़ी थी। चुकी छापामारी के दौरान वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा था।

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वन विभाग पर उठ रहे सवाल

इस कारवाई के बाद से ही वन विभाग पर तरह तरह के सवाल उठने लगे थे। अब इस मामले ने तूल पकड़ा लिया है। वन विभाग जिस रामसेवक राम के ऊपर कार्रवाई करना चाह रही है। उसी रामसेवक राम ने वन विभाग को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।

वन विभाग कर्मी ने ही दी थी जब्त लकड़ी

दरअसल रामसेवक राम ने 8 दिसम्बर यानी गुरुवार को इस मामले से संबंधित वनपाल को एक आवेदन सौंपा है।रामसेवक राम ने आवेदन में लिखा है कि मंगलवार को वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर जो पटरा और लकड़ी ज़ब्त की है। दरअसल वह पटरा और लकड़ी वन विभाग में ही कार्यरत दैनिक मानदेय कर्मी धनेश्वर यादव ने काउंटर बनाने के लिए उपलब्ध करवाया था।

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रात के अंधेरे में पहुंचायी गयी थी लकड़ी

उन्होंने लिखा है कि कुछ लकड़ियां एक माह पूर्व जबकि हाल में भी ट्रैक्टर के माध्यम से एक बोटा लकड़ी पहुचाया था। काउंटर बनाने के लिए मना करने पर धनेश्वर यादव के द्वारा कोई कारवाई नही होने का हवाला देते हुए रामसेवक राम को मजदूरी के तौर पर 1800 रुपये नकद भी दिया था। सबसे ख़ास बात यह है कि वनकर्मी धनेश्वर यादव ने तमाम लकड़ियां रात के अंधेरे में मुहैय्या करायी थी। इससे यह साफ है कि अवैध रूप से पीटीआर से ही ये लकड़ियां काटी गयी होंगी।

पेशेवर बढ़ई मिस्त्री है आरोपी, कई वनकर्मी बनवा चुके हैं पलंग

रामसेवक ने बताया कि वह पेशेवर बढ़ई मिस्त्री का कार्य काफी लंबे समय से करते आ रहा है। उन्होंने कहा मैं पूरी तरह निर्दोष हू। गरीब को साज़िश के तहत इस मामले में फसाया जा रहा है। रामसेवक राम का आरोप है कि वन विभाग एक तरफा कारवाई कर उन्हें फ़साना चाहती है। उन्होंने दावा किया है कि पहले भी कई वनकर्मी लकड़ी देकर उनसे पलंग बनवा चूके है। इसलिए इस मामले पर गहनता से जांच करते हुए वन कर्मियों के घर की भी तलाशी होनी चाहिए। उसके बाद यह मामला पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा।

वन कर्मियों की मिलीभगत से होती है पीटीआर से अवैध कटाई

इधर सूत्रों की माने तो बारेसाढ़ वन प्रक्षेत्र से स्थानीय कई जनप्रतिनिधि और दलाल जंगलों से लकड़ी काटकर उसे महंगे दामों में बिक्री करते है। इसमे स्थानीय स्तर के वन कर्मियों की भी मिलीभगत होती है। जिसके लिए उन्हें भी कमीशन दिया जाता है।

वरीय अधिकारी जांच कर करें कार्रवाई तभी लगेगी रोक

बहरहाल जिस तरह से पीटीआर से लकड़ियों की तस्करी कर जंगलों का दोहन किया जा रहा है। इसपर वन विभाग के अधिकारियों को गंभीरता से विचार करते हुए गहन छापेमारी करने की जरूरत है। तभी इस तरह के अवैध कार्यों पर लगाम लग सकेगा। मंगलवार को रामसेवक राम के यहां हुई छापेमारी में प्रभारी वनपाल परमजित तिवारी, वनरक्षी वरदान भगत, अरुण कुमार व त्वरित कार्रवाई दल के सदस्य शामिल थे।