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लातेहार: शिक्षकों की मनमानी हुई उजागर, रसोइया के भरोसे संचालित हो रहा विद्यालय

गोपी कुमार सिंह/गारू

लातेहार : जिले भर में सरकारी स्कूलों की बदहाली सुधरने की जगह दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। शिक्षकों की मनमानी और मध्यान भोजन में गड़बड़ी की बात आम हो गयी है। खासकर ग्रामीण इलाकों से इस तरह की शिकायतें हरदिन देखने को मिल जाती है। मनमानी का आलम यह है कि मीटिंग का हवाला देकर शिक्षक मीटिंग से 2 से 3 घंटे पहले ही स्कूल छोड़कर निकल जा रहे है। सरकारी स्कूलों की मनमानी से जुड़ा मामला लातेहार से सामने आया है।

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लातेहार में शिक्षकों की मनमानी के कारण सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों का भविष्य अंधकार में जाता हुआ नजर आ रहा है। थे लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत संचालित रुद, पंडरा, विजयपुर समेत कई अन्य सरकारी स्कूलों की पड़ताल की जहाँ से घोर लापरवाही सामने आयी है।

दरअसल, इन स्कूलों में शुक्रवार को शिक्षक नजर ही नहीं आये। स्कूल के शिक्षक मीटिंग का हवाला देकर 11 बजे ही स्कूल छोड़कर निकल गये। जबकि बीआरसी में 1 बजे से मीटिंग आयोजित की गयी थी। जबकि इन स्कूलों से बीआरसी भवन की दूरी महज 15 किलोमीटर है। जहां से पहुचने में मात्र 30 मिंट ही लगता है। बावजूद शिक्षक 11 बजे ही स्कूल से निकल गये थे। जिसके बाद स्कूली बच्चे स्कूल की छुट्टी तक स्कूल प्रांगण में खेलते हुए नजर आये। ये सिर्फ शुक्रवार की बात नहीं है बल्कि इस तरह की बहानेबाजी कर प्रखंड के अधिकांश शिक्षक स्कूल से अमूमन गायब ही रहते हैं। जिसके कारण स्कूल में अध्ययनत बच्चों का पठन पाठन पर काफी असर पड़ रहा है।

आलम यह कि स्कूली बच्चों को शिक्षा मंत्री, प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तक का भी नाम नही पता है। इन स्कूलों में मनमानी का आलम यह है कि बच्चो के मध्यान भोजन में भी घोटाला किया जा रहा है। सरकार के द्वारा तय मेन्यू के अनुसार शुक्रवार को बच्चों को अंडा चावल देना था। लेकिन शुक्रवार को पंडरा स्कूल के बच्चो को अंडा की जगह दाल, चावल और टमाटर की चटनी दिया गया था। जबकि रुद स्कूल में चावल, दाल और खानापूर्ति के नाम पर 100 से भी अधिक बच्चो के बीच महज 10 से 12 अंडा का भुजिया दिया गया था।

इधर कटाके की ठंड होने के बावजूद कई स्कूलों के बीच के बदन पर स्वेटर तक नही था। जबकि पौरो में जूता भी नजर नही आया। ऐसे में सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी किस हद तक हावी है। बावजूद विभाग इससे अंजान बना हुआ है। शिक्षको के स्कूल से गायब रहने समेत अन्य तरह की खामियां नजर सामने है।

बता दे कि यह इलाका मूल रूप से आदिवासी बहुल है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आदिवासी बच्चो के साथ खिलवाड़ एवं मध्यान भोजन में घोटाला कर रहे शिक्षकों पर क्या कुछ कारवाई होती है।