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मनिका: परहिया टोला के आदिम जनजाति परिवार नदी का दूषित पानी पीने को विवश, चापाकल और जल मीनार बना हाथी का दांत

कौशल किशोर पांडेय/मनिका

दो किमी दूर नदी से पानी लाकर बुझाते हैं प्यास

लातेहार : सरकार एक तरफ नल जल योजना के तहत हर घर में पीने का पानी पहुंचाने का काम कर रही है वहीं मनिका प्रखंड के कोपे पंचायत के सेमरी गांव के परहिया टोला आदिम जनजाति के लोग आज भी नदी का पानी पीने को विवश हैं। गांव के लोग दो किलोमीटर दूर नदी से पानी लाकर पीते हैं। इस गांव की आदिम जनजाति के लोग आज भी पानी की सुविधा से पूरी तरह महरूम हैं इस गांव में आदिम जनजाति के करीब 10 घर हैं जिनमें करीब 50 लोग रहते हैं।

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ग्रामीण सविता देवी, नामधारी परहिया, सुरेंद्र परिया ने बताया कि वे दो किलोमीटर दूर जाकर नदी का पानी पीते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यहां एक हैंडपंप भी था, वह भी कई माह से खराब पड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि एक जल मीनार भी लगायी गयी है। लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। कई बार इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुके हैं। लेकिन किसी ने नहीं सुनी। सबसे अहम खबर यह है कि उस गांव की आदिम जनजाति के लोगों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है।

क्या कहते हैं बीडीओ

इस संबंध में बीडीओ बीरेंद्र किंडो ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। पेयजल विभाग को अवगत कराया जाएगा और बहुत जल्द पानी की व्यवस्था कर दी जायेगी।

क्या कहना है पीएचईडी के जेई का

पीएचईडी के जेई सतीश कुमार ने कहा कि मुझे जानकारी नहीं थी। कल उस गांव में जाकर पीने के पानी की व्यवस्था के लिए चापाकल ठीक करवाऊंगा।