Breaking :
||हेमंत सरकार का निर्णय, सरकारी कार्यक्रमों में ‘जोहार’ शब्द से अभिवादन करना अनिवार्य||सरकार खतियान आधारित स्थानीयता बिल फिर राज्यपाल को भेजेगी : JMM||राज्य स्तरीय झांकी में पलामू किला को मिला पहला स्थान, राज्यपाल ने किया पुरस्कृत||नहीं रहे ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नव किशोर दास, इलाज के दौरान तोड़ा दम||दुमका में मूर्ति विसर्जन के दौरान जय श्री राम के नारे बजाने को लेकर दो समुदायों के बीच झड़प||मुख्यमंत्री ने लातेहार के कार्यपालक अभियंता पर अभियोजन चलाने की दी स्वीकृति||1932 के खतियान आधारित स्थानीयता वाले विधेयक को राज्यपाल ने लौटाया, कहा- सरकार वैधानिकता की करे समीक्षा||भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने किया पतरातू गांव का दौरा, घटना की CID जांच की मांग||लातेहार: मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों में भिड़ंत, गांव पहुंचे विधायक और एसपी, माहौल तनावपूर्ण||ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री पर जानलेवा हमला, कार से उतरते ही ASI ने मारी गोली

सूखे का जायजा लेने पलामू पहुंची केंद्रीय टीम, गांवों का किया दौरा, किसानों ने कहा- माड़-भात पर भी संकट

पलामू : जिले में सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल बुधवार को पलामू पहुंचा। टीम के सदस्यों ने जिला कृषि पदाधिकारी, सहकारिता पदाधिकारी एवं उद्यान पदाधिकारी के साथ बैठक कर जिले में सूखे की स्थिति एवं सूखे से प्रभावित किसानों की जानकारी ली। साथ ही सूखे को देखते हुए किसानों को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं की पूरी जानकारी दी।

पलामू की ताज़ा ख़बरों के लिए व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करें

पलामू पहुंची केंद्रीय दल में निदेशक सीडब्ल्यूसी प्रमोद नारायण, उप निदेशक महेश कुमार, सहायक निदेशक बृजमोहन सिंह, उप निदेशक कृषि (इंजीनियरिंग) आशिम रंजन एक्का शामिल थे। टीम के सदस्यों ने पलामू के चैनपुर के बांसडीह पंचायत के बजमरवा व तीन टोलवा का दौरा किया।

इस दौरान टीम के सदस्यों ने विभिन्न किसानों से बातचीत की। इस दौरान टीम के सदस्यों ने लोगों से बारिश की स्थिति, फसलों की बुआई, पिछले साल की तुलना में इस साल कितनी खेती हुई, इसकी जानकारी ली।

टीम ने महूगांव में चौपाल लगाकर स्थानीय रैयतों से सूखे की जानकारी ली। इस दौरान उपस्थित सभी किसानों ने एक स्वर में टीम के सदस्यों को बताया कि यह सूखा 1966 के सूखे से भी भयंकर है।

किसानों ने कहा कि अभी फसल नहीं हुई है, इसलिए किसान दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं और दो पैसे कमा ले रहे हैं। लेकिन हम भविष्य में पीने के पानी को लेकर चिंतित हैं। गांव के तालाब सूख गये हैं। चापाकल भी जवाब दे रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना था कि अगर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होगी तो लोग बिना पानी के कैसे रहेंगे। सभी लोगों ने मिलकर टीम से डीप बोरिंग व पेयजल के अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की।

किसान आदित्य नारायण पांडेय ने कहा कि उन्होंने अपने 70 साल के कार्यकाल में ऐसी स्थिति नहीं देखी, सूखे के कारण माड़-भात पर संकट आ गया है। टीम ने बंदुवा गांव का भी दौरा किया और लोगों से सूखे के कारण उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया।