Breaking :
||लातेहार: बालूमाथ में विवाहिता ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मायके वालों ने लगाया हत्या का आरोप||लातेहार: मनिका में सड़क निर्माण स्थल पर उग्रवादियों का हमला, JCB मशीन में लगायी आग||वेतन नहीं मिलने से नहीं हुआ बेहतर इलाज, गढ़वा में DRDA कर्मी की मौत||लातेहार: हेरहंज में पेड़ से गिरकर युवक की मौत, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल||लातेहार: सड़क दुर्घटना में घायल महिला की इलाज के दौरान मौत, मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम||लातेहार: महुआडांड में आदिवासी महिला से दुष्कर्म के बाद बनाया वीडियो, वायरल करने व जान से मारने की धमकी||लातेहार: चंदवा पुलिस ने अभिजीत पावर प्लांट से लोहा चोरी कर ले जा रहे पिकअप को पकड़ा, एक गिरफ्तार||लातेहार: महुआडांड़ में बस और बाइक की जोरदार टक्कर में दो युवकों की मौत, एक गंभीर, देखें तस्वीरें||पलामू: मनरेगा कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में दो जेई सेवामुक्त, एक पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश||हेमंत सरकार पर जमकर बरसे अमित शाह, उखाड़ फेंकने का आह्वान

टाना भगतों का आंदोलन : आखिर क्या है पांचवीं अनुसूची का विवाद

टाना भगतों का आंदोलन

झारखण्ड के लातेहार जिले में टाना भगतों ने मंगलवार को डीसी कार्यालय को प्रभावित किया। यहाँ तक कि ऑफिस से अधिकारीयों को बाहर निकाल कर ताला जड़ दिया। यह आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। बुधवार को फिर से टाना भगतों ने समाहरणालय का घेराव कर कार्यालय का काम पूरी तरह से ठप कर दिया। टाना भगतों कि मांग है कि झारखण्ड में हो रहे पंचायत चुनाव को रद्द किया जाए। उनके अनुसार यह चुनाव भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन करता है।

क्या है भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची

भारतीय संविधान में कुल 12 अनुसूचियाँ हैं। उनमे से पांचवीं अनुसूची में देश के सभी अनुसूचित क्षेत्रों की जानकारी है। अनुसूचित क्षेत्र को तय करने के लिए उस राज्य के राज्यपाल द्वारा रिपोर्ट देश के राष्ट्रपति को भेजा जाता है। जिसके बाद राष्ट्रपति द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि कौन सा क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आएगा। निर्धारित करने का मापदंड उस क्षेत्र में जनजातियों की जनसख्या प्रतिशत होती है। झारखण्ड के 24 जिलों में से 13 जिलों को अनुसूचित घोषित किया गया है।

इसे भी पढ़ें :-  टाना भगतों के आंदोलन से डीसी कार्यालय ठप, अफसरों को बाहर निकाल कर जड़ा ताला

पांचवीं अनुसूची का पंचायत चुनाव से सम्बन्ध

भारत के पंचायती राज अधिनियम के तहत जनजाति बहुल क्षेत्रों में चुनाव का अलग प्रावधान होता है। वे जनजाति बहुल क्षेत्र जो भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल है, वहां Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 यानी पेसा अधिनियम लागू होता है। जिसके तहत यह प्रावधान है कि जनजाति बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभा का संगठन ऐसा होना चाहिए कि जनजातीयों के परंपरागत कानून , सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं के अनुरूप हो।

इसे भी पढ़ें :- पुलिस के जवान ने वृद्ध महिला को डंडे से पीटा, वीडियो हुआ वायरल

कहाँ है समस्या

टाना भगतों का मानना है कि इस चुनाव से उनके पारम्परिक ग्राम सभा जो कि उनके जनजातीय कानून से चलती है उसमे व्यवधान उत्पन्न होगा। झारखण्ड में ऐसी कई जनजातियां हैं जिनका खुद का पारम्परिक ग्राम सभा चलता है। जिनके प्रमुख को मांझी , मुंडा , इत्यादि कहा जाता है। अब इस पंचायत चुनाव से चुने गए मुखिया उनके पारम्परिक कानूनों को शायद नहीं समझ पाएंगे। आपस में मतभेद भी हो सकते हैं। हालाँकि, पंचायत चुनाव में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण कि व्यवस्था की गई है।

लातेहार की ताज़ा ख़बरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

टाना भगतों का आंदोलन लातेहार जिले में क्यों

झारखण्ड का लातेहार जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहाँ अनुसूचित जनजातियों की जनसख्या प्रतिशत 45.54 % है। यहाँ हो रहे पंचायत चुनाव में अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण का प्रतिशत भी ज्यादा है। टाना भगतों को लगता है कि यहाँ हो रहे चुनाव की वजह से उनके अस्तित्व को खतरा है। इस वजह से वे आंदोलन पर उतर आएं हैं।

झारखण्ड की ताज़ा ख़बरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

टाना भगतों का आंदोलन