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लातेहार: हर महीने 4 करोड़ से अधिक का तंबाकू उत्पाद खा जाते हैं जिलेवासी

एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि झारखंड में 50.1 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू का सेवन करने वाले पुरुषों का प्रतिशत 63.6 है, जबकि ऐसी महिलाओं का प्रतिशत 35.9 है।

लातेहार: आज 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। तंबाकू सेवन के खतरों और स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक प्रभावों के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाता है। यह हर साल होता है। उसके बाद भी जिले में तंबाकू और तंबाकू उत्पादों की खपत का अंदाजा इसके कारोबार के आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है।

प्रतिमाह 4 करोड़ रुपये का होता है कारोबार

एक अनुमान के मुताबिक जिले भर में हर महीने तंबाकू और तंबाकू उत्पादों का कारोबार 4 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। यह आंकड़ा तंबाकू और तंबाकू उत्पादों के कारोबार से जुड़े लोगों से बातचीत से सामने आया है।

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बिना लाइसेंस के तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर है रोक

हालाकि झारखंड के शहरी इलाकों में 1 अप्रैल से बिना लाइसेंस के तंबाकू उत्पादों के बिक्री पर रोक लगा दी गयी है। राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों में तंबाकू विक्रेताओं के लिए वेंडर लाइसेंसिंग की प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई है। जिन दुकानों के पास तंबाकू उत्पादों का लाइसेंस है, उन दुकानों में टॉफी, कैंडी, चिप्स, बिस्कुट, पेय पदार्थ या किसी भी तरह की खाद्य सामग्री की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।

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युवा ही नहीं, छोटे बच्चे भी आ रहे इसकी जद में

इसके बावजूद जिले में गुटखा खाने वालों की संख्या घटने के बजाय दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। शहरी क्षेत्र ही नहीं गांव में गुटखा खाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में युवा ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चे भी इसकी जद में आ रहे हैं। पान की दुकान से लेकर किराना दुकान तक गुटखा व तंबाकू उत्पाद बिक रहे हैं।

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स्कूलों के आसपास तंबाकू की बिक्री प्रतिबंधित

सरकार ने स्कूल के 100 गज के दायरे में तंबाकू की बिक्री पर रोक लगा दी है। उसके बाद भी जिले के अधिकांश स्कूलों के आसपास तंबाकू व गुटखा की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। स्कूल के पास बिक्री के कारण स्कूली बच्चे भी गुटखा का सेवन कर रहे हैं।

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सरकारी कर्मचारी भी करते हैं सेवन

सरकारी कार्यालयों में तंबाकू का सेवन प्रतिबंधित है। उसके बाद भी कर्मचारी इसका सेवन करते नजर आ जाते हैं। कार्यालयों की दीवारें इसकी गवाह हैं।

जिले में प्रतिमाह 25 टन खैनी की खपत

खैनी के खुदरा व थोक व्यापारियों के अनुसार जिले में हर माह 25 टन खैनी की खपत होती है। एक तंबाकू व्यापारी ने बताया कि जिले में तंबाकू की बिक्री करीब 25 टन प्रतिमाह है। इसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये होगी। खैनी खाने वाले लोग शहर से लेकर गांव स्तर तक भी पाए जाते हैं। शहर में पान गुमटी से लेकर गांव स्तर पर किराना दुकान तक खैनी आसानी से मिल जाती है।

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जागरूकता का है अभाव

यह कार्यक्रम हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस यानी 31 मई को आयोजित किया जाता है। किशोरों और अन्य लोगों को तंबाकू के सेवन के खतरों के बारे में जागरूक किया जाता है। तंबाकू के सेवन से बड़ी संख्या में लोग कैंसर सहित अन्य जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसका सेवन घातक है। रोकथाम के लिए सघन छापेमारी अभियान भी चलाया जाता है। इसके बावजूद तंबाकू बेचने व सेवन करने वालों की संख्या घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही है।

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