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मनरेगा योजना स्थल पर रात में JCB और सुबह चलाया टैक्टर, BDO ने कहा योजना है पूर्ण!

गोपी कुमार सिंह/गारू

लातेहार : जिले के गारू प्रखण्ड अंतर्गत कार्रवाई पंचायत में मनरेगा योजना के तहत संचालित वीर शहीद पोटो खेल विकास मैदान के योजना स्थल पर रात्रि में जेसीबी से कार्य कराने का मामला उजागर हुआ है। हालांकि मनरेगा की साइड पर उपलब्ध जानकारी के हिसाब से इस योजना का कार्य पूर्ण हो चुका है। लिहाजा योजना बंद हो चुकी है। लेकिन सवाल है कि आखिर 2020-21 की योजना जो पूरी हो चुकी है। उसमें रात में जेसीबी मशीन और सुबह ट्रैक्टर क्यू चलाया गया। जानकारी के मुताबिक वीर शहीद पोटो खेल विकास मैदान का निर्माण 3.924 लाख की लागत से कराया गया है। जिसपर शुक्रवार की रात जेसीबी और शनिवार की सुबह ट्रैक्टर चलने से कई सवाल उठने लगे है।

ट्रेक्टर से खेत जुताई की तस्वीर

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प्रखंड विकास पदाधिकारी ने योजना स्थल का लिया जायजा

हालांकि योजना स्थल पर जेसीबी मशीन चलाए जाने की जानकारी के बाद मामले की जांच करने खुद प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रताप टोप्पो योजना स्थल पर पहुँचे। जहाँ उन्होंने योजना स्थल का जायजा लेने के बाद मनरेगा के कार्य मे जेसीबी चलाने के मामले से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा यह योजना पूरी हो चुकी है। इसमें अब जेसीबी मशीन चलाने का कोई मतलब नही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सूरत में मनरेगा कार्यो में जेसीबी का प्रयोग करने वाले लोगों को बख्शा नही जाएगा।

अगस्त माह में खेल मैदान की स्तिथि की तस्वीर

पहले भी इस योजना पर खेत बनाने का हवाला देकर चलाया गया है जेसीबी मशीन

लेकिन सवाल वही है कि आखिर योजना पूरी होकर बंद हो चुकी है तो फिर रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन और सुबह ट्रैक्टर चलाने के पीछे क्या मकसद हो सकता है। THE NEWS SENSE की पड़ताल में इस योजना से संबंधित कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए है। बता दें कि अगस्त माह में इस योजना स्थल पर जेसीबी से कार्य कराया गया था। उस वक्त योजना स्थल पर मौजूद लोगों ने खेल मैदान के समीप खेत बनाने का हवाला दिया था। उस वक्त जेसीबी से हुए कार्य का सबूत THE NEWS SENSE के पास मौजूद है। लबोलुबाब तो ये है कि जिस जगह खेत बनाने का दावा किया गया था। वहां कोई खेत नही बनाया गया है। वहां की मट्टी कटाई कर खेल मैदान में भरा गया है।

रात्रि में योजना स्थल पर चलती जेसीबी मशीन

अगस्त में खेल मैदान की स्तिथि थी दयनीय, सितंबर में हो गया खेलने योग्य

पिछले माह खेल मैदान की स्तिथि काफी दयनीय थी। लेकिन सितंबर आते ही खेल मैदान खिलाड़ियों के खेलने योग्य हो गया है। इससे इस बात का पुख्ता प्रमाण हो जाता है कि इस योजना में जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया है। इधर कुछ स्थानीय लोगों की माने तो इस योजना में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से बिना कार्य पूर्ण हुए ही जैसे-तैसे डिमांड भरकर इस योजना की सारी राशि निकासी कर ली गई है और योजना को बंद कर दिया गया है। और अब जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर से कार्य कराया जा रहा है। ताकि कोई सवाल न उठा सके।

अगस्त माह में योजना स्थल पर चलती जेसीबी मशीन की तस्वीर

संदेह के घेरे में है पूरा मामला, मजदूरों ने भी लगाया मजदूरी नही भुगतान करने का आरोप

लेकिन ये पूरा मामला संदेश के घेरे में अगर इस मामले की वरीय पदाधिकारी जांच करेंगे तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। इधर स्थानीय कुछ मजदूरों ने इस योजना में मजदूरी कराकर राशि का भुगतान नही करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में ग्राम प्रधान सुरेश उरांव ने बताया कि कारवाई गांव के दर्जनों लोगों का सप्ताह भर से ज्यादा का मजदूरी बकाया है। लेकिन साल भर बीत जाने के बावजूद भी उक्त राशि का भुगतान नही किया गया है। उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला जांच के घेरे में है।

मामले की जानकारी देते ग्राम प्रधान सुरेश उरांव

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ग्राम प्रधान ने भी मामले को लेकर जतायी भ्रष्टाचार की आशंका, जांच की मांग

चुकी हाल ही में एक बैठक में पंचायत सेवक से मजदूरी भुगतान के संबंध में पूछने पर बताया कि अगले 15 दिनों के अंदर मजदूरी भुगतान हो जाएगा। ऐसे में अगर योजना पूरी होकर बंद हो गई तो फिर पंचायत सेवक 15 दिनों में मजदूरी राशि भुगतान हो जाने का दावा कैसे कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर मनरेगा योजनाओं में जेसीबी मशीन से कार्य किया जाएगा तो स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार कैसे मुहैय्या होगा। यही कारण है कि गांव के ग्रामीण रोजगार की तलाश में बाहरी राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहें हैं। बहरहाल अब देखना यह है कि क्या इस मामले की जांच होती है और अगर होती तो मनरेगा योजनाओं में जेसीबी से कार्य करने वाले लोगो पर क्या कारवाई होती है।