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आश्चर्य से भरी है रांची-टाटा हाइवे पर स्थित तैमारा घाटी, बदल जाता है समय, कम हो जाती है गाड़ी की स्पीड

रांची-टाटा तैमारा घाटी : वह 11 जनवरी, 2022 का दिन था. रांची में रहनेवाले संजय बोस अपनी कार से रांची-जमशेदपुर हाइवे (एनएच-33) पर बुंडू की तरफ जा रहे थे. जामचुंआ से दशम फॉल के बीच रोड के किनारे बने एक छोटे से चर्च के सामने से गुजरते वक्त उनके मोबाइल पर एक कॉल आया. वे ड्राइव कर रहे थे, इसलिए फोन नहीं उठाया. थोड़ी देर बाद रुक कर उन्होंने कॉल बैक करने के लिए अपना मोबाइल देखा, तो उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. कॉल लॉग पर तारीख दिख रही थी 17 अगस्त, 2023 और समय था शाम के 3 बजकर 36 मिनट. यानी डेढ़ साल आगे का समय. उस कॉल के बाद संजय को उस दिन जितने भी कॉल आये, सब पर समय और तारीख सही थी. सिवाय उस मिस्ड कॉल के. रीडिस्कवर झारखंड नामक यूट्यूब चैनल चलानेवाले जानेमाने फोटोग्राफर संजय बोस के मोबाइल पर आज भी मिस्ड कॉल का वह नंबर सब से ऊपर दिखता है.

ऐसा नहीं है कि ऐसा सिर्फ संजय बोस के साथ हुआ. दो दिन पहले 24 जून 2022 को एक एनजीओ (NGO) में काम करने वाले कमल किशोर सिंह रात के 8 बजे बुंडू टोल ब्रिज पार कर रांची आ रहे थे. तैमारा घाटी पार करने के बाद उनके फोन पर मोबाइल का समय और तारीख ठीक करने का मैसेज आया. कमल किशोर मैसेज पढ़ कर चौंक गये. उस वक्त उनका मोबाइल 25 जनवरी 2024 की तारीख और समय सुबह के 9 बजकर 06 मिनट दिखा रहा था. यानी लगभग डेढ़ साल आगे का समय. उनकी कार उस वक्त उसी चर्च के सामने से गुजर रही थी. तो क्या संजय और कमल उस चर्च के पास से गुजरते समय टाइम ट्रैवेल कर रहे थे या वहां किसी पारलौकिक शक्ति ने समय को बदल दिया था?

सिर्फ संजय और कमल ही नहीं, रांची-टाटा रोड पर उस चर्च के सामने से गुजरनेवाले बहुत से लोगों ने इस बात को नोटिस किया है. कुछ लोग इसे नेटवर्क की गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, तो कुछ थोड़ी देर चर्चा करके भूल जाते हैं. लेकिन एनएच -33 पर जामचुआं और दशम फॉल मोड़ के बीच उस चर्च के सामने मोबाइल की तारीख और समय का बदल जाना कोई आम घटना नहीं है. खासकर तब, जब एनएच 33 पर स्थित तैमारा घाटी के बारे में ढेरों डरावनी कहानियां लोगों के मन में गहरे तक पैठी हैं.

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घाटी की घुमावदार सड़क के बीचोंं बीच सफेद साड़ी में दिखनेवाली औरत के कारण कई दुर्घटनाओं के होने की बात कही जाती है. इन हादसों से बचने के लिए वहां हनुमान और काली की प्रतिमाओं की स्थापना भी की गयी है. हालांकि दुर्घटनाएं उसके बाद भी होती रही हैं. कुछ लोगों ने अनुभव किया है कि जमशेदपुर से रांची जाते समय तैमारा घाटी में एक खास जगह पर गाड़ियों की गति काफी धीमी हो जाती है. बहुत कोशिश करने पर भी मुश्किल से गाड़ी घाटी को पार कर पाती है, जबकि वहां कोई खास चढ़ाई भी नहीं है. इससे ज्यादा चढ़ाई चक्रधरपुर-रांची और रामगढ़-रांची की घाटी में है. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि घाटी में उस जगह पर जलती हुई स्ट्रीट लाइटों की रोशनी हमेशा कांपती रहती है.

हालांकि चर्च के सामने से गुजरते वक्त टाइम और डेट की गड़बड़ी सिर्फ दो-तीन मिनट तक ही रहती है. उसके बाद समय और तारीख अपने आप ठीक हो जाती है. यही कारण है कि ज्यादातर लोग इसे नोटिस नहीं करते और करते भी हैं, तो नेटवर्क की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. जानेमाने भू वैज्ञानिक और प्रकृति विज्ञानी डॉ नितीश प्रियदर्शी ने इन घटनाओं को अपने फेसबुक पर साझा करते हुए लिखा है कि अगर हमलोग यह मान भी लें कि यह फोन की गड़बड़ी थी, तो ऐसा हर जगह होना चाहिए था. सिर्फ उसी स्पॉट पर क्यों? क्या वहां कोई चुंबकीय विकिरण है, जो मोबाइल को प्रभावित करता है? या फिर काल और समय का कोई मामला है.

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नीतीश कहते हैं कि इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि कभी आप किसी अनजान जगह पर गये हों, फिर भी आपको लगेगा कि जैसे इस स्थान पर पहले भी आ चुके हैं. या किसी नये व्यक्ति मिलने पर लगेगा कि आप पहले भी उससे मिल चुके हैं. काल और समय के रहस्य पर आज भी शोध हो रहा है. वैसे भी तैमारा घाटी के रहस्य पर बहुत सारी कहानियां सोशल मीडिया और वेबसाइट्स पर हैं.

तो रांची-टाटा रोड पर उस चर्च के सामने कौन सी अदृश्य शक्ति समय को बदल देती है, क्या वह कोई पारलौकिक शक्ति है या प्रकृति का कोई रहस्य? इस पर डॉ नितीश कहते हैं कि लद्दाख के रास्ते में सड़क के किनारे चुंबकीय क्षेत्र के बोर्ड लगे हैं. छोटानागपुर का पठार हिमालय से काफी पुराना है. हो सकता है कि तैमारा घाटी से चर्च तक ऐसा कोई भूगर्भीय चुंबकीय क्षेत्र हो. या इस स्थान पर धरती के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) और ब्रम्हांड से आनेवाले कॉस्मिक किरणों (cosmic rays) के मिलने से ऐसा होता हो.

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डॉ नीतीश के अनुसार कई साल पहले नासा के वैज्ञानिकों ने वाराणसी में एक शोध के दौरान वरुणा नदी से अस्सी घाट के बीच पाये जानेवाले धूलकणों में कॉस्मिक डस्ट (cosmic dust) के अंश पाये थे. जिससे हिंदुओं की काशी में मरने से मोक्ष मिलने की मान्यता को बल मिलता है. डॉ नितीश कहते हैं कि हमारी धरती और इसका सौरमंडल एक अबूझ पहेली है और इसमें बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है. डॉ नितीश के अनुसार वे चर्च के सामने तारीख और समय बदलने के कारणों की विस्तृत पड़ताल के लिए जल्दी ही वहां जायेंगे.

बहरहाल, जो भी वैज्ञानिक तर्क दिये जायें, लेकिन तैमारा घाटी से जामचुआं के बीच बने चर्च के सामने घटनेवाली घटनाएं सामान्य नहीं हैं. रात के अंधेरे में सफेद कपड़ों में दिखनेवाली औरत की कहानियां हों अथवा घाटी में गाड़ी का चक्का जाम होने का अनुभव. या फिर चर्च के सामने से गुजरते समय तारीख और समय का बदल जाना, अदृश्य और पारलौकिक शक्तियों में यकीन रखनेवाले जब रात को इस हाइवे से गुजरते हैं, तो एकबारगी उनकी रीढ़ की हड्डी में एक ठंडी सिरहन तो दौड़ ही जाती है.

रांची-टाटा तैमारा घाटी

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