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शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की तैयारी, शिक्षा मंत्री कल कर सकते हैं औपचारिक घोषणा

रांची : झारखंड सरकार शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त करने को लेकर गंभीर है। इसको लेकर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो ने बुधवार को विभिन्न शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों के साथ दूसरे दौर की बैठक बुलाई है। इसमें शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त करने का निर्णय लिया जा सकता है।

शिक्षा मंत्री के आवास पर होने वाली बैठक में विभागीय अधिकारी भी शामिल होंगे। शिक्षा मंत्री पहले ही शिक्षकों को मध्याह्न भोजन कार्य से मुक्त करने का आश्वासन दे चुके हैं। उम्मीद है कि बुधवार को मंत्री जगन्नाथ महतो इस मामले में औपचारिक घोषणा भी कर देंगे।

इससे पहले 9 जून 2022 को शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के सुझाव के लिए शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों को बुलाया था। इसमें सभी शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों ने साफ तौर पर कहा कि पहले सभी शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से मुक्त किया जाए. तभी बच्चों को स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। इसके बाद मंत्री ने सभी यूनियनों से उनके शैक्षणिक कार्यों की पूरी जानकारी मांगी थी जो शिक्षकों से लिए जाते हैं। शिक्षकों ने भी मंत्री को इसकी लिखित जानकारी दी है।

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शिक्षकों का दावा है कि उन से मध्यान भोजन में प्रतिदिन खर्च का हिसाब-किताब रखने, प्रतिदिन व मासिक रिपोर्ट भेजने, स्कूल के बजट बनाने, 37 पेज के यू डाइस फॉर्म ऑनलाइन भरने, प्रत्येक दिन ई विद्या वाहिनी से छात्रों की उपस्थिति बनाने, विद्यालय प्रबंधन समिति व सरस्वती वाहिनी के खातों का संधारण और ऑडिट करवाने,

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शिक्षकों का दावा है कि वे मध्याह्न भोजन में दैनिक खर्चों का लेखा-जोखा रखते हैं, दैनिक और मासिक रिपोर्ट भेजते हैं, स्कूल का बजट बनाते हैं, 37-पृष्ठ यू डाइस फॉर्म ऑनलाइन भरते हैं, ई विद्या वाहिनी से प्रतिदिन छात्रों की उपस्थिति दर्ज करते हैं, प्रबंधन समिति और सरस्वती वाहिनी के खाते का संधारण और ऑडिट करवाते हैं, विद्यालय के पोषक क्षेत्र में बच्चों की गणना करने, प्रत्येक माह शिक्षक-अभिभावक बैठकें आयोजित करने, प्रत्येक माह की 25 तारीख को विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठकें आयोजित करने, पुस्तकों का वितरण, चावल, खाना पकाने की कास्ट, बाल संसद रजिस्टर तैयार करने आदि का कार्य करते हैं। इससे उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। जिसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।