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Friday, June 14, 2024
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पड़ताल: गांव के दबंग ने ज़बरन रुकवाया PM आवास का निर्माण, 4 सालों से सरकारी बाबुओं के कार्यालय का चक्कर लगा रहा पीड़ित परिवार

गोपी कुमार सिंह/रुपेश कुमार अग्रवाल/लातेहार

लातेहार : समूचे झारखंड में जमीन की कालाबाजारी और अवैध कब्जा का खेल जोरों पर है। राजनीतिक पकड़, दंबगई और पैसे के दमपर किसी के भी जमीन पर दबंग तबके के लोग कब्जा जमा ले रहे है। एक ऐसा ही मामला लातेहार के बालूमाथ से सामने आया है। यहां एक ब्राह्मण परिवार की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नही सरकार के द्वारा आवंटित प्रधानमंत्री आवास के निर्माण कार्य पर भी जबरन रोक लगा दिया गया है। जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है।

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तस्वीर में दिख रही बुजुर्ग महिला सावित्री देवी है। इन्होंने कभी सोचा भी नही होगा कि इस उम्र में उन्हें बेघर होना पड़ेगा। इसलिए नही है कि उनका कोई सहारा नही है बल्कि इसलिए चुकी इनकी जमीन पर दबंग लोगो की बुरी नजर पड़ गई है। जमीन हड़पने की नीयत से सावित्री देवी के पूरे परिवार पर जुल्म ढाया जा रहा है और उनकी जमीन पर दबंग लोग जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहे है। जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है।

सावित्री देवी मूलरूप से लातेहार ज़िले के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत चेताग गांव की रहने वाली हैं। सावित्री देवी के बेटे अभिषेक कुमार पांडेय की पुस्तैनी जमीन जो कि उनके दादा स्वर्गीय हरिहर पांडेय के नाम पर है। जिसपर गांव के ही दबंग सुनील पांडेय जो कि भाजपा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष भी रह चुके है। सुनील पांडेय की राजनीतिक में अच्छी पकड़ है। लिहाज़ा वह राजनीति पकड़ का दुरुपयोग कर अभिषेक कुमार पांडेय के दादा की जमीन हड़पकर अभिषेक पांडेय के पूरे परिवार को बेघर करना चाहते है।

इस संबंध में सावित्री देवी ने बताया कि फिलहाल वह पूरे परिवार के साथ खपटैल मकान में रहती है। यह मकान भी जर्जर हालत में है। कभी भी जमीदोंज हो सकता है। सावित्री देवी बताती है कि बरसात के दिनों में घर के अंदर पानी घुस जाता है। जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। परिवार की परेशानी को देखते हुए पति अर्जुन पांडेय के नाम पर सरकार से एक प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति मिली थी। लेकिन 80 फीसदी काम पूर्ण होने के बाद गांव के ही सुनील पांडेय के द्वारा अपनी जमीन बताकर कार्य बंद करा दिया गया है और अक्सर घर के सदस्यों के साथ मारपीट की जाती है। सावित्री देवी सुनील पांडेय के पताड़ना से बेहद घबराई हुई है। आपबीती बताते हुए सावित्री देवी फफक-फफक कर रोने लगती है।

अब ये दूसरी तस्वीर देखिए हाथ मे कागज़ाज लिया हुआ सख्श सावित्री देवी का पुत्र अभिषेक कुमार पांडेय है। जो कागज़ाज दिखाकर सरकार प्रशासन से कह रहा है कि यह जमीन मेरी है। इसके तमाम कागज़ाज उनके पास मौजूद है। अभिषेक कुमार पांडेय को बुजुर्ग माता-पिता की चिंता नही देखी जा रही है। लिहाज़ा वह प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कार्य पूरा कराकर माता-पिता के दुख को दूर करना चाहते है और इसके लिए वह लगातार कभी अंचलाधिकारी तो कभी एसडीओ तो कभी डीसी के पास मदद की फरियाद लेकर पहुच रहे है। लेकिन फिलहाल अभिषेक कुमार पांडेय को कही से कोई मदद मिलती हुई नही दिख रही है।

इस संबंध में अभिषेक कुमार पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास का निर्माण वह खुद की रैयती जमीन पर कर रहे है। आवास का कार्य भी लगभग 80 फीसदी पूरा हो चुका है। योजना का तीन किश्त भी उनके पिता के खाता में आ चुका है। लेकिन इस बीच जबरन डरा धमका कर सुनील पांडेय के द्वारा कार्य बंद करा दिया गया है। जब भी आवास का कार्य शुरू होता है सुनील पांडेय के द्वारा गाली-गलौज और मारपीट किया जाता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल वह खपटैल मकान में रह रहे है लेकिन वह भी धराशाई होने के कगार पर है। उन्होंने बताया कि वह इस समस्या के समाधान के लिए बीते चार साल से सरकारी बाबुओं के कार्यालय का चक्कर लगा रहे है लेकिन कही से कोई मदद नही मिल रही है। उन्होंने इस लापरवाही के लिए सीधे तौर पर अंचलाधिकारी और एसडीओ को जिम्मेदार ठहराया है।

अभिषेक पांडेय ने आरोप लगाया है कि एसडीओ और सुनील कुमार पांडेय के बीच पारिवारिक संबंध है। लिहाज़ा सुनील पांडेय राजनीतिक पकड़ और एसडीओ की मदद से जमीन पर कब्जा करना चाह रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा के कई बड़े नेता भी इस खेल में शामिल है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उन्हें और उनके परिवार को सुनील पांडेय की दादागिरी से मुक्त कराया जाए। ताकि आवास का निर्माण कार्य पूरा हो सके और उनका परिवार बेघर होने से बच सके।

इधर जब हमने इस संबंध में बालूमाथ अंचलाधिकारी आफताब आलम से बात-चीत की तो उन्होंने कहा आपके माध्यम से हमे यह जानकारी मिली है। उन्होंने कहा मामले की जांच की जाएगी, अगर वाकई में पीड़ित परिवार का ही जमीन है तो आवास का निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा। अगर उनकी जमीन नही है तो वह अवैध निर्माण माना जायेगा। उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह खुद घटना स्थल जाकर पूरे मामले की जांच करेंगे।

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सीओ आफताब आलम से बातचीत किये हुए पूरे चार दिन बीत गये है। लेकिन सीओ साहब अबतक इस मामले की जांच के लिए घटना स्थल नही पहुँचे है। इससे साफ जाहिर है कि सीओ साहब पीड़ित परिवार की समस्या को लेकर कितने गंभीर है।

बहरहाल सरकारी प्रक्रिया के मुताबिक किसी भी ग्रामीण को प्रधानमंत्री आवास का लाभ तब ही मिल पाता है जब उसकी जमीन और कागज़ाज संबंधित विभाग के कर्मियों के द्वारा सत्यापित कर लिया जाता है। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर सीओ आफताब आलम की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।