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झारखण्ड में बिजली संकट गहराया, कई जिलों में लोड शेडिंग शुरू

झारखण्ड में बिजली संकट

बिजली संयंत्रों में कोयला संकट का असर झारखंड में साफ दिखाई दे रहा है। बिजली पैदा करने वाली कंपनियों ने झारखंड की बिजली आपूर्ति में कटौती शुरू कर दी है। ऐसे में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए पूरे राज्य में लोड शेडिंग की जा रही है। राज्य के विभिन्न जिलों में शुक्रवार शाम पांच बजे से लोड शेडिंग शुरू हो गई।

क्या होती है लोड शेडिंग:-

लोड शेडिंग यानी एक जगह की बिजली काटकर दूसरी जगह सप्लाई की जाती है। ऐसा तब होता है जब बिजली की ज़रूरत ज्यादा हो और सप्लाई कम मिल रही हो। ऐसी स्थिति में कुछ क्षेत्रों में बिजली काट कर अन्य क्षेत्रों में दी जाती है।

राज्य में कितनी ज़रूरत है बिजली की:-

जानकारी के मुताबिक, राज्य में सामान्य दिनों में 1400 मेगावाट बिजली की ज़रूरत होती है। गर्मी के कारण यह ज़रूरत 1800 मेगावाट या इससे अधिक हो जाती है। फिलहाल टीवीएनएल की दो यूनिट से करीब 350 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जबकि 50 मेगावाट इनलैंड पावर उत्पादन को जोड़कर कुल झारखंड में केवल 400 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा आधुनिक पावर से 180 मेगावाट और कुछ बिजली एनटीपीसी और एनएचपीसी से मिलती है।

शेष बिजली सेंट्रल एक्सचेंज से ली जाती है :-

उत्पादन के अलावा शेष बिजली, ज़रूरत के अनुसार सेंट्रल एक्सचेंज से खरीदी जाती है। शुक्रवार को राज्य को 1560 मेगावाट बिजली की जरूरत थी। झारखंड ने एक दिन पहले इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीद के लिए बोली लगाई थी। वहां से बिजली मिलने के बावजूद 160 मेगावाट की कमी रही। इसे लोड शेडिंग के जरिए पूरा किया गया।

इस मुद्दे पर हुई बैठक :-

ऊर्जा संकट पर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ राष्ट्रीय स्तर की बैठक हुई। रांची के धुर्वा स्थित ऊर्जा मुख्यालय में ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, गुजरात समेत अन्य राज्यों में कोयले की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित होने की बात कही गई । जेबीवीएनएल के अधिकारी ने कहा कि इस बैठक में झारखंड ने भी अपनी ऊर्जा संबंधी समस्याओं को मजबूती से रखा। बताया गया कि एनटीपीसी के चतरा स्थित उत्तरी कर्णपुरा परियोजना से 1980 मेगावाट उत्पादन किया जाना था, जिसमें से 500 मेगावाट प्राप्त होना था। अगर इस परियोजना को शुरू किया जाए तो बिजली की कमी को पूरा किया जा सकता है।

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