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बिहार में युवाओं को धार्मिक उन्माद फैलाने की ट्रेनिंग दे रहा PFI, झारखंड से भी फंडिंग, दारोगा गिरफ्तार

झारखंड में पिछले 4 साल से प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) बिहार से देश के खिलाफ बड़ी साजिश रचने की तैयारी कर रहा था पटना के फुलवारीशरीफ में मार्शल आर्ट की आड़ में युवाओं को धार्मिक उन्माद फैलाने और हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दे रहे थे। हैरानी की बात यह है कि झारखंड में प्रतिबंधित होने के बाद भी यह संगठन लगातार पटना में अपने संगठन का विस्तार कर रहा था।

झारखंड सरकार ने पहली बार 21 फरवरी 2018 को पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया था। इस संगठन के सदस्य इसके खिलाफ हाईकोर्ट गए थे। 27 अगस्त 2018 को प्रतिबंध हटा लिया गया था। हालांकि, अदालत ने सरकार को निर्देश दिया था कि सरकार त्रुटियों को दूर करके फिर से पीएफआई पर प्रतिबंध लगा सकती है। सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल कर सकती है। बाद में मार्च 2019 में सरकार ने तकनीकी त्रुटियों को दूर कर पीएफआई पर प्रतिबंध लगा दिया।

झारखंड से बिहार से लेकर केरल तक की जा रही है फंडिंग

झारखंड की PFI यूनिट को पहले केरल से फंड आता था। लेकिन अब झारखंड से ही बिहार, UP, बंगाल और केरल को भी फंड दिया जाता है। झारखंड के खुफिया विभाग के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक संताल परगना में ‘खनिज लूट’ में 25 प्रतिशत राशि पीएफआई तक पहुंच रही है। पाकुड़, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज के उदवा, पतना, बड़हरवा समेत कई इलाकों में इन्हें काफी फंड मिले हैं।

SDPI का सदस्य झारखंड में बिहार से ज्यादा एक्टिव

PFI का ही पॉलिटिकल विंग है सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)। PFI के प्रतिबंधित होने के बाद भी SDPI झारखंड में एक्टिव है। केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में हुए पंचायत चुनाव में PFI ने संगठन से जुड़े 48 लोगों को पंचायत चुनाव में जीत दिलवाई। साथ ही जेल जाने वाले अपने बड़े नेता को जिला परिषद सदस्य का चुनाव भी जितवाया।

29 साल झारखंड में रहने के बाद पिछले साल रिटायर हुआ है जलालुद्दीन

पटना में PFI व अन्य आतंकी संगठनों की साठगांठ के आरोप में गिरफ्तार सेवानिवृत्त दारोगा मो. जलालुद्दीन खान की बहाली 22 जनवरी 1982 को पटना में बतौर आरक्षी हुई थी। बहाली के बाद 10 सालों तक पटना में ही रहा। चार जनवरी 1992 को उसका तबादला गोड्डा हो गया। तब से लगातार वह झारखंड के अलग-अलग इलाकों में ही रहा। 30 अप्रैल 2021 को वह गिरिडीह जिले से सेवानिवृत्त हुआ। रिटायरमेंट के ठीक पहले उसकी पोस्टिंग भेलवाघाटी थाना में दरोगा के पद पर रही थी।