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Thursday, May 23, 2024
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लातेहार: नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर लाखों की ठगी, कई आदिवासी बने प्रलोभन के शिकार

गोपी कुमार सिंह/लातेहार

लातेहार : ज़िले के गारू प्रखंड के विभिन्न पंचायत में निवास करने वाले दर्जनों आदिवासी ग्रामीणों से Safeshop नामक नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर लगभग 8 से 10 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। तथाकथित कंपनी कर्मियों ने भोले-भाले आदिवासी ग्रामीणों को विभिन्न तरह का प्रलोभन देकर पैसे ऐंठे हैं। ग्रामीण भी कर्मियों के प्रलोभन में आकर अब खुद को ठगा महसूस कर रहे है।

प्रति ग्रामीण 500 से लेकर 25 हज़ार रुपये तक की ठगी

इस संबंध भुक्तभोगियों ने बताया कि Safeshop कंपनी कर्मी बताकर लातेहार के बिनगाड़ा निवासी सुशील मुंडा, गारू के डोरम निवासी दिनेश सिंह, चंदवा के साँसग निवासी जितेंद्र उरांव समेत कई अन्य लोगों ने ग्रामीणों को तरह-तरह का प्रलोभन देकर गारू के विभिन्न क्षेत्रों के ग्रामीणों से 500 से लेकर 25 हज़ार रुपये तक की ठगी की है। सिर्फ़ गारू प्रखंड क्षेत्र से Safeshop कंपनी के नाम पर 8 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गयी है।

जमीन गिरवी रखकर दिए पैसे

इस संबंध में भुक्तभोगी अरविंद सिंह, उतिम सिंह, लीलावती देवी समेत अन्य लोगों ने बताया कि भोले-भाले आदिवासी ग्रामीण तथाकथित कंपनी कर्मियों के प्रलोभन के जाल में फंसकर जमीन जगह तक गिरवी रखकर और कर्ज लेकर लेकर पैसे दिए हैं। कर्मियों के द्वारा नेटवर्किंग कंपनी को आगे बढ़ाने के नाम पर अच्छी कमाई होने का प्रलोभन दिया गया था। लेकिन इनके जाल में फंसे किसी भी ग्रामीण को कोई पैसा नही मिला है। जबकि प्रलोभन में फंसकर दिए हुए पैसे भी अब कंपनी के तथाकथित कर्मी देने से इंकार कर रहे है।

किसी ने नहीं की मदद

ठगी के शिकार हुए ग्रामीण पैसे की भुगतान की मांग को लेकर कभी जनप्रतिनिधियों के पास तो कभी थाने का चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि ठगी के शिकार हुए ग्रामीणों को फ़िलहाल कहीं से कोई राहत मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। बहरहाल, ठगी के शिकार हुए ग्रामीण मदद की गुहार लिए हर वो दरवाजा खटखटा रहे हैं जहां से उन्हें उनकी मेहनत और कर्ज लेकर ठगों को दिए हुए पैसे वापस मिल जायें।

प्रखंड प्रमुख ने ग्रामीणों को दिलाया भरोसा

इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रखंड प्रमुख सीता देवी भी ग्रामीणों को ठगों से पैसे वापस दिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा यह बहुत गंभीर मामला है, पहले तो भोले-भाले आदिवासियों को जाल में फंसाकर उनसे जगह जमीन लूट लिया गया और अब उनकी मेहनत की कमाई का पैसा भी ठगा जा रहा है। हालांकि उन्होंने कहा इस ग्रामीणों से भी चूक हुई है। इतनी बड़ी राशि देने से पहले ग्रामीणों को गांव के प्रबुद्ध जनों से सलाह लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा ग्रामीणों से ठगे हुए पैसों का भुगतान करवाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा ग्रामीणों को पैसा वापस दिलाने के लिए हर संभव किया जाएगा।

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