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Friday, April 19, 2024
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नेतरहाट विद्यालय के पूर्व छात्र ने झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को लिखा पत्र, प्राचार्य की कुर्सी पर बैठे सदस्यों पर जतायी कड़ी नाराजगी

लातेहार : नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पूर्व छात्र 73 वर्षीय केदार नाथ लाल दास ने झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को एक पत्र लिखकर आयोग की रुचि कुजूर और आभा वीरेंद्र अकिंचन का ध्यान आकृष्ट कराया है। हाल ही में विद्यालय के छात्रों से मारपीट के मामले की जांच के दौरान आयोग सदस्य के प्राचार्य की कुर्सी पर बैठने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जतायी है।

नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पूर्व छात्र 73 वर्षीय केदार नाथ लाल दास

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उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा है कि नेतरहाट आवासीय विद्यालय के प्राचार्य के पद की एक अपनी गरिमा है, जिसे तार-तार करने वाली एक तस्वीर सामने आयी है। उस तस्वीर में आयोग की सदस्य प्राचार्य की कुर्सी पर बैठे हैं और प्राचार्य सामने वाली कुर्सी पर बैठे हैं, जो विद्यालय के प्राचार्य की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने पत्र में कई ऐसे उदाहरण दिये हैं, जो बताते हैं कि नेतरहाट विद्यालय के प्राचार्य का पद एक गरिमामय पद है।

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The News Sense से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि स्थापना के बाद से इस विद्यालय के सैकड़ों छात्र आईएएस और आईपीएस के पद पर रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। उस प्रतिष्ठित विद्यालय के प्राचार्य को इस स्थिति में देखना आश्चर्य की बात है। उन्होंने कहा कि इंसान की सोच और व्यवहार हमेशा पद की गरिमा सिखाता है। क्षमा करें, आयोग की दोनों सदस्यों की उम्र, गुण, शिक्षण अनुभव हर स्तर पर हमारे विद्यालय के प्राचार्य से कम आंका जायेगा।

उन्होंने पत्र में लिखा है कि नेतरहाट विद्यालय में सभी स्तर के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जाता है। प्राप्त शिकायत पर आयोग को स्कूल से रिपोर्ट लेनी थी। यदि रिपोर्ट प्राप्त हुई और आयोग रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ तो बैठक आयोजित करना उचित होता। एक घटना के कारण आयोग द्वारा विद्यालय की कार्यशैली का निरीक्षण कर कार्यक्रम का विश्लेषण करना अनुचित एवं हानिकारक है। विद्यार्थियों को अधिकारों एवं कर्तव्यों की प्रत्यक्ष जानकारी देना उचित एवं बेहतर है। उन्होंने निरीक्षण की खबर व फोटो मीडिया को देने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे आपत्तिजनक बताया।

उन्होंने लिखा है कि आयोग रांची शहर में ही चौक चौराहे पर होटलों, ढाबों, दुकानों और घरों में कम उम्र के छात्र काम करते हैं। पढ़ते नहीं हैं। अगर आयोग वहां भी समय देता तो फायदा होता। उन्हें कर्तव्यों एवं अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करता।

अंत में उन्होंने नेतरहाट स्कूल के प्राचार्य को पत्र लिखकर आयोग से खेद व्यक्त करने का अनुरोध किया है।

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