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लातेहार: इलाज के अभाव में आदिम जनजाति की महिला होमगार्ड व कोख में पल रहे आठ माह के बच्चे की मौत

गोपी कुमार सिंह/गारू

स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही से गयी दोनों की जान

लातेहार : जिले के गारू प्रखंड से दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां आदिम जनजाति समुदाय के एक महिला होमगार्ड और उसके कोख में पल रहे आठ माह के बच्चे की मौत इलाज के अभाव में हो गयी।

अचानक बिगड़ी तबियत

मृत महिला की पहचान कोटाम पंचायत अंतर्गत डोमाखाड़ गांव निवासी 25 वर्षीय अनिमा कुमारी पिता दशरथ परहिया के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अनिमा होमगार्ड जवान के रूप में 2018 में बहाल हुई थी। जबकि 2022 में उसका ट्रेनिंग पूरा हुआ था। जिसे लगभग 25 दिनों के लिए चुनावी डयूटी में तैनात किया था। उसके बाद से वह घर मे रह रही थी। जिसकी अचानक तबियत बिगड़ने से रविवार की सुबह मौत हो गयी।

समय पर नहीं पहुंचा एम्बुलेंस

बता दें कि अनिमा गर्भावस्था में थी। अनिमा के कोख में पल रहा आठ माह का बच्चा भी दुनिया में आने से पहले मां के साथ ही काल के गाल में समा गया। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा अगर समय पर एम्बुलेंस गांव में पहुच जाती तो शायद इस तरह की घटना नही होती।

घर की इकलौता सदस्य जिसकी लगी थी नौकरी

मृतिका की मां तारो देवी ने बताया कि अनिमा की अचानक तबियत बिगड़ने पर स्थानीय सहिया के द्वारा जांच की गयी। बाद में सहिया के द्वारा बेहतर इलाज का सलाह दिया गया। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल कर्मियों को फोन के माध्यम से एम्बुलेंस भेजवाने की मांग की। लेकिन गारू रेफरल अस्पताल का एम्बुलेंस समय पर नही पंहुच सका। जिससे इलाज के अभाव में अनिमा और उसके कोख में पल रहे आठ माह के बच्चे की मौत हो गयी। स्थानीय लोगों ने बताया कि घर में अनिमा ही थी जिसकी नौकरी होमगार्ड में लगी थी। बाकी परिवार के अन्य सदस्य मजदूरी करते हैं।

सरकार से मदद की गुहार

आपको बता दें कि आदिम आदिवासी समुदाय एक लुप्तप्राय प्रजाति है। बावजूद सरकार या प्रशासन के किसी भी अधिकारियों ने मृतिका के परिजनों से मुलाक़ात तक नही की। स्थानीय लोगों ने बताया कि अनिमा चुनाव में लगभग 25 दिनों तक ड्यूटी में रही थी। लेकिन उस पैसे का भी भुगतान नही किया गया है। परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

JMM प्रखंड अध्यक्ष ने हर संभव मदद का दिलाया भरोसा

इधर, जेएमएम के गारू प्रखंड अध्यक्ष तौकीर उर्फ मंटू मिया मामले की जानकारी के बाद परिजनों से मिले और घटना को लेकर दुःख जताया। उन्होंने कहा अनिमा की मौत का सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था है। अगर समय पर एम्बुलेंस पहुच जाता तो शायद अनिमा और उसके कोख में पल रहा बच्चा दोनों बच सकते थे। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार गरीब-गुरबा के लिए कार्य कर रही है। लेकिन प्रखंड स्तर के अधिकारियों की लापरवाही से अनिमा की मौत हो जाना निंदनीय घटना है। उन्होंने परिजनों को सरकार और प्रशासन से हर सम्भव मदद दिलाने का भरोसा दिया है।

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