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Sunday, March 3, 2024
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समन की अनदेखी के बाद ईडी हेमंत सोरेन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट के लिए कोर्ट जाने की कर रही तैयारी

रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ईडी द्वारा भेजे गये छह समन पर जवाबी पत्र भेजा लेकिन उन्होंने एजेंसी के समन को नजरअंदाज कर दिया और पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए। ईडी अब हेमंत सोरेन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रही है। एजेंसी अब कोर्ट से हेमंत सोरेन के खिलाफ वारंट जारी कराने और उन्हें गिरफ्तार करने के विकल्पों पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है।

जमीन घोटाले की जांच कर रही ईडी ने सोरेन को पहली बार 14 अगस्त को समन जारी किया था। इसके बाद उन्हें 24 अगस्त, 9 सितंबर, 23 सितंबर, 26 सितंबर, 4 अक्टूबर और छठी बार 12 दिसंबर को पेश होने के लिए समन भेजा गया था। सोरेन इनमें से किसी भी समन पर उपस्थित नहीं हुए। सोरेन को आखिरी समन 10 दिसंबर को जारी किया गया था और उन्हें 12 दिसंबर को सुबह 11 बजे रांची में एजेंसी के जोनल कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया था।

सोरेन के ईडी कार्यालय पहुंचने की संभावना को लेकर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी। ईडी दफ्तर के बाहर पूरे दिन हंगामा होता रहा लेकिन सोरेन पेश नहीं हुए। वह ईडी कार्यालय के ठीक सामने से होते हुए दोपहर तीन बजे रांची एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर से दुमका के लिए रवाना हो गये, जहां उन्हें सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में शामिल होना था।

जिस जमीन घोटाले में ईडी सीएम से पूछताछ करना चाहती है, उस मामले में रांची के पूर्व डीसी आईएएस छवि रंजन समेत कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। दक्षिणी छोटानागपुर के तत्कालीन कमिश्नर नितिन मदन कुलकर्णी की जांच रिपोर्ट से यह घोटाला सामने आया और इसी के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। मामला सेना के कब्जे वाली जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि फर्जी नाम-पते के आधार पर झारखंड में सेना की जमीन की खरीद-फरोख्त की गयी। इस संबंध में रांची नगर निगम ने प्राथमिकी दर्ज करायी थी। ईडी ने उसी एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।

मुख्यमंत्री ने ईडी द्वारा भेजे जा रहे समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई किये बिना ही उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा था। इसके बाद उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर ईडी के समन को रद्द करने का अनुरोध किया, लेकिन मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने 13 अक्टूबर को उनके अनुरोध को खारिज कर दिया और समन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अपनी दलील में कहा था कि मुख्यमंत्री पहले ही समन का उल्लंघन कर चुके हैं। वह ईडी के किसी भी समन पर उपस्थित नहीं हुए। ऐसे में उनके लिए समन को चुनौती देने का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। ईडी से मिली जानकारी के मुताबिक, कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सोरेन के पास पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होने का कानूनी विकल्प भी नहीं है। एजेंसी अब जांच में सहयोग न करने का हवाला देकर सोरेन के खिलाफ कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी करवा सकती है। इस मामले पर ईडी मुख्यालय में भी विचार किया जा रहा है।

ED Hemant Soren arrest warrant