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Sunday, February 25, 2024
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मुख्यमंत्री का निर्देश, 14 अगस्त तक राज्य के शत-प्रतिशत पात्र किसानों को KCC से करें आच्छादित

मुख्यमंत्री ने की कई विभागों की समीक्षा, दिये आवश्यक दिशा निर्देश

रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शुक्रवार को कई विभागों के कार्य प्रगति की समीक्षा की और कई निर्देश दिये। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाऊंडेशन ट्रस्ट), ऊर्जा विभाग, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, राजस्व, भूमि सुधार एवं निबंधन विभाग, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग और महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से संचालित योजनाओं की समीक्षा की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग को दिए कई महत्वपूर्ण निर्देश

राज्य में 24 लाख से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, हर हाल में यह लक्ष्य प्राप्त होना चाहिए।

विगत 2 वर्षों में किसानों के बीच 10,912 करोड़ रुपये की राशि किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए वितरित किया गया है। राज्य के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। पूरी प्रतिबद्धता के साथ किसानों से संबंधित प्रत्येक योजना को पारदर्शिता के साथ उन तक पहुंचाएं।

मुख्यमंत्री कृषि ऋण राहत योजना में किसी भी हाल में लापरवाही नहीं बरतें। चिन्हित पात्र किसानों को मुख्यमंत्री कृषि ऋण राहत योजना का लाभ अवश्य पहुंचाएं।

कृषि ऋण माफी के वैसे लाभुक जो छूटे हुए हैं उनकी वस्तुस्थिति एकत्र कर ऐसे सभी जरूरतमंद किसानों को लाभ पहुंचाने का काम करें।

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत वितरित किए गए पशुओं का बीमा अनिवार्य करें। कमेटी बनाकर पशु बीमा इंश्योरेंस में पहुंच रही बाधाओं को दूर करें।

वैसे पशु बीमा कंपनी जिन्होंने लापरवाही बरती है उनपर कड़ी कानूनी कार्रवाई करें।

वित्तीय वर्ष 2022-23 में मुख्यमंत्री पशु विकास योजना के तहत पशु बीमा के लिए राज्य सरकार ने 12 करोड़ रुपए का प्रीमियम भरा है लेकिन पशु बीमा का लाभ राज्य के किसानों को नहीं मिल पा रहा है। पशु बीमा का लाभ अनिवार्य रूप से किसानों के मिले यह हर हाल में सुनिश्चित करें।

हमारे किसान मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना का लाभ लेने के लिए बड़ी मुश्किल से निवेश करते हैं। किसानों को किसी प्रकार से कोई नुकसान नही पहुंचे इसका विशेष ध्यान रखें।

खरीफ फसल के लिए बीज वितरण एवं फर्टिलाइजर सप्लाई का कार्य ससमय पूरा करें। वितरण कार्य में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखें।

राज्य के प्रत्येक जिले में फर्टिलाइजर स्टॉकिस्ट बनाएं। यूरिया, डीएपी सहित अन्य फर्टिलाइजर की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

ऊर्जा विभाग की संचालित योजनाओं की समीक्षा की

ऊर्जा विभाग द्वारा लागू की गई वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम का अब तक 50,185 उपभोक्ता लाभ ले चुके हैं। इसके जरिए विभाग को बकाया बिजली बिल के रूप में 84.5 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है।

डीएमएफटी (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाऊंडेशन ट्रस्ट) के कार्य की समीक्षा

डीएमएफटी फंड का उपयोग प्रत्येक जिला शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, सड़क, आधारभूत संरचना सहित अन्य विकास योजनाओं के कार्य के लिए प्राथमिकता के तौर पर करें।

डीएमएफटी फंड से जनहित की कई योजनाएं ली जा सकती हैं। सही योजना लेकर जरूरतमंद लोगों को अधिक से अधिक लाभ देने का प्रयास करें।

कई जिलों में डीएमएफटी फंड के तहत बड़ी राशि उपलब्ध है। डीएमएफटी फंड को खनन क्षेत्र की विकास योजनाओं में खर्च करने का बेहतर रोडमैप तैयार कर योजना का अनुमोदन लें।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा

झारखंड एजुकेशन रिफॉर्म की ओर आगे बढ़ रहा है। पहले चरण में 80 स्कूलों को स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में तब्दील किया गया है। सभी वर्ग-समुदाय के लोगों ने शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इस नई पहल को सराहा है। बच्चों ने स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में तब्दील इन विद्यालयों में नामांकन को लेकर रुचि दिखायी है। अभिभावकों में बच्चों के क्वालिटी एजुकेशन को लेकर राज्य सरकार के प्रति विश्वास जगा है। आने वाले समय में सरकार का यह नवीन पहल राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इन स्कूलों पर सभी जिलों के उपायुक्त विशेष नजर रखें।

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी व्यवस्था की शुरुआत बहुत अच्छी होती है लेकिन अंत उतनी अच्छी तरह से नहीं होता है। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं हो यह सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी तरह स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की व्यवस्था ध्वस्त न हो यह सुनिश्चित करें।

राज्य के प्रत्येक जिलों में अलग-अलग व्यवस्थाएं एवं क्षमताएं हैं। स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में कई और चीजें जोड़ने की आवश्यकता है। उपायुक्त निरंतर इन स्कूलों का मॉनिटरिंग करें।

कभी-कभी विभाग या कार्यपालिका के अंदर कार्यशैली में विसंगतियां पाई जाती हैं जो उलझने पैदा करती हैं। कई बार व्यवस्थाओं में चीजें पीछे जाने लगती है ऐसा बिल्कुल न हो इसका ख्याल रखें।

सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पठन-पाठन के अलावा और कोई कार्य में न लगाएं इस निमित्त विभाग एक नियमावली तैयार करे। विभाग यह भी सुनिश्चित करें कि जिला के उपायुक्त जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ बैठक कर गुणवत्ता शिक्षा के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करे।

राजस्व ,भूमि सुधार एवं निबंधन विभाग की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने राजस्व, भूमि सुधार एवं निबंधन विभाग की समीक्षा के क्रम में दाखिल खारिज के हज़ारों मामले के लंबित होने एवं निरस्त किए जाने को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि जब ऑनलाइन म्यूटेशन की व्यवस्था शुरू की गई है तो फिर दाखिल खारिज के मामलों के निष्पादन में विलंब होना काफी चिंताजनक है।

मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया कि वे ऑनलाइन म्युटेशन सिस्टम की निगरानी करने के साथ उसकी नियमित समीक्षा करें। इस सिलसिले में अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों के साथ बैठक कर दाखिल खारिज के मामलों के लंबित और निरस्त किए जाने की वजह की जानकारी लें। अगर इसमें जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। तय समय सीमा में दाखिल खारिज के मामले निपटाए जाएं, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की समीक्षा

विभाग जाति प्रमाण पत्र 30 दिन के भीतर निर्गत कराना सुनिश्चित करे।

वर्ग 9-12 में अध्ययनरत बच्चों को अभियान चलाकर प्राथमिकता के तौर पर जाति प्रमाण पत्र निर्गत करें।

स्कूली शिक्षा विभाग तथा प्रज्ञा केंद्र बेहतर समन्वय बनाते हुए प्रमाण पत्र निर्गत करने का कार्य करें।

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण की समीक्षा

हेमन्त सोरेन ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की समीक्षा के क्रम में कहा कि पंचायत स्तरीय दवा दुकान योजना सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत ग्रामीण युवाओं को दवा दुकान के लिए लाइसेंस दिया जाना है। इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए सभी उपायुक्त अपने-अपने जिलों में विशेष रणनीति बनाकर कार्य करें । इस संबंध में युवाओं को इस योजना के तहत दवा दुकान खोलने के लिए प्रेरित करें।

महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा

सभी जिले यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में कोई भी बुजुर्ग वृद्धावस्था पेंशन से वंचित नहीं है । इस संदर्भ में 30 जून तक वे अपनी रिपोर्ट सरकार को समर्पित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में दिव्यांगता के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में दिव्यांगता क्यों बढ़ रही है और किन-किन इलाकों दिव्यांगता के केसेज ज्यादा आ रहे हैं, इसकी मैपिंग उपायुक्त अपने स्तर पर कराएं ताकि इसे रोकने की दिशा में आवश्यक कदम उठाया जा सके।

राज्य में लगभग 11 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन बनाया जाना है। इसके लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सभी उपायुक्त कदम उठाएं और डीएमएफटी तथा सीएसआर फंड से भवन निर्माण का कार्य सुनिश्चित करें।

विभाग की ओर से बताया गया कि राज्य में 95 प्रतिशत दिव्यांगों को दिव्यांगता पेंशन से आच्छादित किया जा चुका है।

सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के तहत 9 लाख बच्चियों को इसका लाभ सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 7 लाख 29 हज़ार बच्चियों को इस योजना से अब तक जोड़ा जा चुका है।