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मंत्री मिथिलेश ठाकुर पर भी मंडराये संकट के बादल, चुनाव आयोग ने डीसी से मांगी रिपोर्ट

रांची : झारखंड सरकार के गढ़वा विधायक और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर की विधानसभा सदस्यता का मामला भी चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से इस पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।

राज्य चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रवि कुमार ने गढ़वा जिला निर्वाचन अधिकारी सह उपायुक्त रमेश घोलप से मंत्री मिथिलेश ठाकुर द्वारा विधानसभा चुनाव के दौरान द्वारा दिए गए शपथ पत्र के माध्यम सेअपने संंबंध में दी गई जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

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गढ़वा उपायुक्त द्वारा मिथिलेश कुमार ठाकुर के नामांकन के समय चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे की जानकारी अप्रैल 2022 के अंतिम सप्ताह में ही भेजी गई है।

जानकारी के मुताबिक मंत्री मिथिलेश ठाकुर पर विधानसभा चुनाव के दौरान ठेका कंपनी चलाने का आरोप है। जिसे लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 9A का उल्लंघन बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार इस मामले की शिकायतकर्ता सुनील महतो रांची जिले के समलोंग के कतारी बगान निवासी है। उन्होंने शिकायत में बताया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान मिथिलेश ठाकुर द्वारा भरे गए फॉर्म-26 में उल्लेख है कि वह चाईबासा के सत्यम बिल्डर्स के भागीदार हैं। यह कंपनी सरकारी ठेके लेने का काम करती है। विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य सरकार के साथ उनके कई अनुबंध अस्तित्व में थे।

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सुनील महतो ने चुनाव आयोग से लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसके आलोक में चुनाव आयोग ने गढ़वा डीसी से चुनाव के समय मिथिलेश कुमार ठाकुर द्वारा दिए गए हलफनामे से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी। इसके आलोक में डीसी द्वारा चुनाव आयोग को रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।

डीसी के रिपोर्ट में कुछ अन्य जानकारी को ले चुनाव आयोग द्वारा फिर से रिपोर्ट मांगी गई थी। जिसे गढ़वा डीसी ने अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में उसे फिर से मांगीं गई सूचनाओं को समेकित करते हुए चुनाव आयोग को रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। जिस पर चुनाव आयोग द्वारा सुनवाई की जानी है।

डीसी की रिपोर्ट में कुछ अन्य जानकारियों को लेकर चुनाव आयोग ने फिर से रिपोर्ट मांगी थी। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में पुन: गढ़वा डीसी द्वारा मांगी गई जानकारी को पुख्ता करते हुए चुनाव आयोग को रिपोर्ट उपलब्ध करायी गयी। जिस पर चुनाव आयोग को सुनवाई करनी है।