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लातेहार: मनरेगा योजना में बड़ा पेंच, नाबालिग स्कूली छात्रों को मजदूर बताकर की जा रही फर्जी निकासी

गोपी कुमार सिंह/लातेहार

लातेहार : बाल मजदूरी को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें काफी प्रयास कर रही हैं। लेकिन बिचौलिए सरकार की इस सोच पर ग्रहण लगाने का काम कर रहे हैं। आलम यह है कि स्कूल के नाबालिग बच्चों को ही मजदूर बनाया जा रहा है। इधर, पूरे मामले को लेकर प्रखंड प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है, या यूं कहें कि प्रखंड प्रशासन व संबंधित कर्मियों की मिलीभगत से ही इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है।

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स्कूली छात्रों के नाम पर की जा रही फर्जी निकासी

दरअसल, लातेहार जिले के गारू प्रखंड अंतर्गत कारवाई पंचायत से बाल मजदूरी का मामला सामने आया है। यहां नाबालिग स्कूली छात्रों को मनरेगा मजदूर बनाकर बिचौलियों द्वारा फर्जी निकासी किया जा रहा है। आपको बता दें कि गोइंदी गांव निवासी विकास कुमार उम्र 14 वर्ष पिता अनंत सिंह जो उत्क्रमिक प्लस टू उच्च विद्यालय में 10वीं कक्षा में पढ़ता है। लंबे समय से इसे मनरेगा मजदूर बताकर मनरेगा योजना के नाम पर फर्जी निकासी की जा रही है।

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मूकदर्शक बना प्रखंड प्रशासन

जबकि किरानी सिंह पिता प्रवीण सिंह, लालबिहारी सिंह पिता हुलास सिंह, सुगंती कुमारी पिता राजदेव सिंह सभी स्कूल के छात्र हैं। लेकिन उन्हें मनरेगा मजदूर बताकर उनके नाम से लगातार फर्जी निकासी की जा रही है। बावजूद इसके प्रखंड प्रशासन पूरे मामले को लेकर मूकदर्शक बना हुआ है। इसलिए मनरेगा योजना में बिचौलिए जमकर लूटपाट कर रहे हैं। लेकिन प्रखंड प्रशासन इस मामले से अनभिज्ञ होकर मौन समर्थन दे रहा है।

रिश्वतखोरी का खेल जग जाहिर

यहां यह भी चर्चा है कि संबंधित विभाग के कर्मियों को इस खेल में शामिल होने के बदले कमीशन दिया जाता है। हालांकि कमीशन और रिश्वतखोरी का खेल जग जाहिर है। सबूत के तौर पर झारखंड के विभिन्न जिलों से रिश्वतखोरी के मामले में एसीबी के हत्थे चढ़ रहे अधिकारियों को देख कर लगाया जा सकता है।

रोजगार सेवक, पंचायत सेवक और मुखिया की भूमिका अहम

मनरेगा घोटाले और जालसाजी में सबसे अहम भूमिका रोजगार सेवक, पंचायत सेवक और मुखिया का होता है। इसलिए बिचौलिया स्कूल में पढ़ने वाले नाबालिग छात्रों के नाम से फर्जी आईडी बनाता है और नाबालिग छात्रों के खातों में पैसे जमा कर फर्जी निकासी करता है।

फर्जी आईडी से हुआ है भुगतान

बहरहाल, अगर प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे तो गारू प्रखंड से ही हजारों फर्जी आईडी का खुलासा हो सकता है। जिन्हें मनरेगा मजदूर बताकर पैसे निकाले जा रहे हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में फर्जी आईडी में करीब 13 से 18 हजार रुपये का भुगतान भी किया गया है। लेकिन मामले को लेकर संबंधित कर्मियों को कोई जानकारी नही होना उनके कार्यशैली पर सवालिया निशान है।

जांच के बाद हो सकता है बड़ा खुलासा

जबकि नियमों के मुताबिक किसी भी योजना के भुगतान से पहले योजना का डिमांड लगता है। जिसमें मुखिया, पंचायत सेवक व रोजगार सेवक मजदूर की पुष्टि व हस्ताक्षर करते हैं। इसके बाद मस्टर रोल निकलता है, फिर कहीं मजदूर पक्का होता है और अंत में एफटीओ होता है। इसके बावजूद नाबालिग छात्रों को मजदूर बताकर फर्जी निकासी की जा रही है। हालांकि इस पूरे मामले की जांच के बाद ही गड़बड़झाला का खुलासा हो सकता है।