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लातेहार में बड़ा मनरेगा घोटाला, ग्रामीणों को लाभुक बताकर 1 लाख से अधिक की फर्जी निकासी

गोपी कुमार सिंह/रूपेश कुमार अग्रवाल

लाभुकों को पता नहीं और कर ली गयी निकासी

लातेहार : जिले में इन दिनों मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर घोटाला किया जा रहा है। लेकिन पूरे मामले को लेकर प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है। नतीजन घोटालेबाज मनरेगा योजना में जमकर लूट मचाये हुए है। हाल ही में ज़िले के मनिका प्रखंड से मनरेगा योजना के नाम पर गलत ढंग से लाखों रुपये की फर्जी निकासी करने का मामला अभी ठंडा भी नही हुआ था कि ज़िले के सदर प्रखंड अंतर्गत इचाक पंचायत से मनरेगा योजना में 1 लाख रुपये से अधिक राशि के गबन का मामला सामने आया है।

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टीसीबी (ट्रेंच कम बेड) निर्माण के नाम पर फर्जी निकासी

दरअसल, लबरपुर गांव में कई ग्रामीणों को टीसीबी (ट्रेंच कम बेड) का लाभुक बताकर लगभग 1 लाख 30 हजार रुपये से अधिक राशि की फर्जी निकासी कर ली गयी है। जबकि टीसीबी का निर्माण हुआ ही नही है। यहां बिना कार्य किये की दर्जनों लाभुकों के नाम पर फर्जी निकासी कर ली गयी है। जबकि लाभुकों को इस संबंध में कोई जानकारी ही नही है। हालांकि बाद में गांव के एक जागरूक व्यक्ति ने ग्रामीणों को बताया कि कई लोगों के नाम पर मनरेगा योजना पूर्ण दिखाकर एक लाख तीस हजार रुपये की फर्जी निकासी कर ली गयी है। उक्त राशि की निकासी मनरेगा योजना के अंतर्गत संचालित टीसीबी योजना के नाम पर की गयी है।

लाभुक एतवा

लाभुकों को नहीं है इस बात की जानकारी

इधर, जिन ग्रामीणों को कागज़ों में टीसीबी का लाभुक बनाया गया है। उन्ही में से एतवा उरांव, दिनेश उरांव, कलावती देवी, सरिता देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि योजना के विषय मे हमलोगों को न कोई जानकारी है और न ही हमारी जमीन पर योजना का निर्माण करवाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि संबंधित विभाग के कर्मियों से मिलकर बिचौलिये फर्जी तरीके से निकासी किये है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर संबंधित कर्मियों एवं बिचौलियों पर कारवाई करने की मांग की है।

लाभुक कलावती देवी

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पंचायत सेवक व रोजगार सेवक के पास नहीं है जवाब

इधर, इस संबंध में पक्ष लेने के लिए The News Sense संवादाता गोपी कुमार सिंह ने पंचायत सेवक संतोष उरांव से फोन के माध्यम से संपर्क किया तो उन्होंने कोई जवाब नही दिया। जबकि रोजगार सेवक राजकुमार उरांव ने भी कुछ स्पष्ट नही बताया।

लाभुक सरिता देवी

जांच के बाद होगी कार्रवाई : बीडीओ

इधर, इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी मेघनाथ उरांव ने बताया कि इस संबंध में कोई जानकारी नही है। अगर इस तरह का कुछ मामला हुआ है तो इसकी जांच कर कारवाई की जाएगी। The News Sense संवादाता रूपेश कुमार अग्रवाल ने प्रखंड विकास पदाधिकारी से सवाल किया कि आपकी तरफ़ से क्या कारवाई होगी। इसपर उन्होंने कहा पहले तो पूरे मामले की जांच की जाएगी अगर वाक्य में ऐसा कुछ हुआ है तो जुर्माना लगाया जाएगा।

योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका की हो जांच

बहरहाल, मनरेगा योजना के तहत संचालित योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका बढ़ गयी है। हालांकि मनरेगा कानून में ठेकेदारी पर पाबन्दी है, लेकिन मनरेगा की शुरूआती दिनों से ही योजनाओं के चयन से कार्यान्वयन तक में ठेकेदार (बिचौलिये) जुड़े हैं। ठेकेदारों की मनरेगा कर्मियों व प्रशासन के साथ साठ-गांठ होने के कारण मज़दूर व योजना के लाभुक इन पर ही निर्भर रहते हैं। अनेक पंचायत प्रतिनिधि खुद ठेकेदारी करते हैं या उनमें से अधिकांश इस साठ-गांठ का हिस्सा हैं। इस तंत्र को मिलने वाला राजनैतिक संरक्षण भी किसी से छुपा नहीं है। यह भी आम बात है कि जब जो राजनैतिक दल सत्ता में रहता है, तब उनके कैडर की मनरेगा ठेकेदारी में भूमिका बढ़ जाती है। बहरहाल मनरेगा के तहत ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने का दावा पूरी तरह खोखला नज़र आ रहा है।सीधे तौर पर कहे तो राज्य में मनरेगा योजना महज लूट का केन्द्र बना हुआ है।

इन ग्रामीणों को टीसीबी का लाभुक बताकर की गयी फर्जी निकासी

लबरपुर गांव निवासी एतवा उरांव के के नाम पर 25833, दिनेश उरांव के नाम पर 21330, कलावती देवी के नाम पर 36600, सरिता देवी के नाम पर 19197, सममलाल उरांव के नाम पर 26307 जबकि रमण उरांव के टीसीबी निर्माण के नाम पर 20382 रुपये की फर्जी निकासी की गयी है। ग्रामीणों ने दावा किया है कि गांव के ही पूर्व वार्ड सदस्य भूखन राम के द्वारा फर्जीवाड़ा कर उक्त ग्रामीणों को टीसीबी का लाभुक बताकर फर्जी निकासी की गयी है।