Breaking :
||चतरा समेत इन चार लोकसभा सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को विरोधियों से अधिक अपनों से खतरा||झारखंड: पहले चरण के चुनाव में पलामू समेत इन चार लोकसभा सीटों पर युवा मतदाता निभायेंगे निर्णायक भूमिका||आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के पिता और पत्नी के खिलाफ कुर्की वारंट का इश्तेहार जारी||पलामू लोकसभा: शीर्ष माओवादी कमांडर रहे कामेश्वर बैठा समेत तीन उम्मीदवारों ने किया नामांकन||पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जमानत याचिका पर कल होगी सुनवाई||लातेहार में भीषण सड़क हादसा, शादी समारोह से लौट रही कार पेड़ से टकरायी, पति की मौत, पत्नी और पोते की हालत नाजुक||लातेहार: सिरफिरे युवक ने दो महिलाओं समेत पिता को कुल्हाड़ी से काट डाला, गिरफ्तार||झारखंड एकेडमिक काउंसिल कल जारी करेगा मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट||लातेहार: चुनाव प्रशिक्षण में बिना सूचना के अनुपस्थित रहे SBI सहायक पर FIR दर्ज||ED ने जमीन घोटाला मामले में आरोपियों के पास से बरामद किये 1 करोड़ 25 लाख रुपये
Wednesday, April 24, 2024
BIG BREAKING - बड़ी खबरझारखंडरांची

रांची: रिम्स की व्यवस्थाओं से नाराज हाईकोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार कहा- इसे बंद क्यों नहीं कर देती सरकार

रांची : रिम्स में आवश्यक चिकित्सा सामग्री जैसे दवाएं, सीरिंज, रुई, दस्ताने, एक्स-रे प्लेट आदि उपलब्ध नहीं हैं। प्रबंधन खरीद नहीं रहा है। रिम्स में भी टेस्टिंग नहीं हो रही है। ज्यादातर जांच मरीज के परिजनों को बाहर से करवानी पड़ती है। उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे इलाज प्रभावित होता है। बारिश का पानी टपक रहा है। वार्ड में बारिश का पानी घुस रहा है। चिकित्सा उपकरण खराब हो रहे हैं। कई जांच बंद हैं। ऐसा लगता है कि रिम्स की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। रिम्स की व्यवस्था कब सुधरेगी? अगर सुधार नहीं हो सकता तो राज्य सरकार इसे बंद क्यों नहीं कर देती। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मौखिक रूप से यह टिप्पणी की।

रांची की ताज़ा ख़बरों के लिए व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करें

झारखंड उच्च न्यायालय ने रिम्स में इलाज की दयनीय स्थिति और चिकित्सा आपूर्ति की कमी को लेकर एक स्वत: संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने दो घंटे तक सुनवाई की।

Raja AD

नाराज पीठ ने कहा कि बार-बार आदेश देने के बाद भी रिम्स की व्यवस्था अब तक नहीं बदली है। ऐसा लगता है कि रिम्स प्रशासन में खुद को बदलने की इच्छाशक्ति नहीं है। रिम्स में जांच मशीनों के खराब होने से इलाज का अतिरिक्त खर्च लोगों को उठाना पड़ रहा है।

रिम्स निदेशक के हाजिर न होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि निदेशक कहां है। मौखिक रूप से कहा कि जब निदेशक के खिलाफ अवमानना ​​के मामले की सुनवाई हो रही है तो उन्हें खुद उपस्थित होना चाहिए था। जब उन्हें किसी बात की जानकारी नहीं थी तो निदेशक की जगह प्रभारी निदेशक को क्यों भेजा गया। अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख तय की गई है। रिम्स की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने तर्क दिया, जबकि सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सचिन कुमार पेश हुए।

झारखण्ड की ताज़ा ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें

पीठ ने कहा कि वह रिम्स की अव्यवस्था पर अपनी आंखें बंद नहीं रख सकता। रिम्स के डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते हैं और नॉन प्रैक्टिस अलाउंस लेते हैं। बेंच ने रिम्स के वकील से जानना चाहा कि किन कारणों से रिम्स के डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने की इजाजत दी गई है। पीठ ने यह भी कहा कि रिम्स एक स्वतंत्र संस्थान है। जब निर्णय जीबी में लिया जाता है, तो इसे सरकार के पास अनुमोदन के लिए क्यों भेजा जाता है, जबकि मंत्री अध्यक्षता करते हैं।